Saturday, November 8, 2008

जिहाद


आज कल जिहाद को लेकर पूरे हिन्दुस्तान में जो बातें हो रही हैं उनमें कुछ तो लागों को ग़लत फहमी है कुछ लोग एक साजिश के तहत भी इस्लाम को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इस्लाम में जिहाद के बारे जो बताया गया है वोह सिर्फ़ इतना है की किसी भी ज़ुल्म, ना इंसाफी, के ख़िलाफ़ खड़ा हो जाना जिहाद है जिहाद के मायेने ये हैं की संघर्ष किया जाए अत्याचात के ख़िलाफ़, बेईमान के ख़िलाफ़ अब ये बात पैदा होती है की आख़िर इस्लाम ने ऐसी लडाई के लिए ज़ंग, युद्ध या वार जो अंग्रेज़ी में बोला जाता है इस्तेमाल नही किया इस की वजह ये है की पुराने ज़माने में अक्सर जो युद्ध हुआ करते थे उनके लिए ज़ंग या वार बोला जाती था ये लडाई सिर्फ़ अपने जातीफाएदों के लिए लड़ी जाया करती थीइसलिए इस्लाम ने जिहाद को वार या लडाई कह कर संबोधित नही कियाबल्कि जिहाद कहाआज कल जिहाद के ख़िलाफ़ बालने का मक़सद सोर्फ़ और सिर्फ़ ये है किसी भी तरह इस्लामको बदनाम किया जाए और मुसलमानों को जिहाद से नफरत दिलाई जाए जिससे मुसलमान कोम एक मुर्दा कोमबन जाए और इसे दुनिया से मिटा दिया जाएमानते है की जिहाद के नाम पर कुछ ग़लत लडाई भी लड़ी गयीलेकिन वह सिर्फ़ कुछ लोगो की अपनी गलती थीइस वक्त मुस्लाल्मानो को चाहिए की वोह जिहाद के इस्लामीतसव्वुर को ख़ुद भी समझे और दूसरों की भी समझाएं