संसद चुनाव के बाद कांग्रेस फिर देश की सत्ता पर काबिज हो गयी है। मुसलमान ऐसे खुश हैं जैसे कि उनकी खिलाफत दिल्ली पर कायम हो गयी हो। ये वही कांगे्रस है जिसकी पिछली चालीस साल की हकुमत में इतने सांप्रदायिक दंगे हुए और बेशुमार मुसलमान इन दंगों का शिकार हो गये। क्या कांग्रेस के आने से यह खतरे फिर नहीं बढ़ गये कि देश में कहीं फिर सांप्रदायिक दंगों की बाढ़ न चल पड़े। यह बात कांग्रेस के भावी राजकुमार राहुल को सोचनी पड़ेगी कि जिन मुसलमानों की वजह से वह उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने में कामयाब हो गयी उन्हें वह क्या दे पायेंगे। कांग्रेस इस खुशफहमी में न रहे कि मुसलमानों ने अगर इस बार वोट कांगे्रस को दे दिया तो वह आइंदा भी इसी तरह वोट देते रहेंगे। इसका कारण यह बना कि सपा से खिसका मुसलमान वोट सीधा कांग्रेस की तरफ मुड़ गया जिसकी वजह से कांग्रेस को अच्छी खासी कामयाबी मिली। हालांकि कांग्रेस के कुछ हलकों की तरफ से यह बात भी उड़ायी गयी कि इस जीत में राहुल ने कोई जादू किया है यह बात सिर्फ हकीकत से मुंह मोडऩे जैसा है। यह वर्ग वह है जो आरएसएस से किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है। इस वर्ग का मानना है कि कहीं कांग्रेस सच्चर रिपोर्ट के आधार पर मुसलमानों के लिये कल्याणकारी योजनाएं न चला दे।
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Thursday, June 11, 2009
सोच विचार
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