Monday, August 17, 2009

geet-mehdi hasan

हम चले इस जहां से
दिल उठ गया यहां से
उन्हें दे दो खबर मर चले हम मगर
ले चले याद उनकी जहां से
यूं भी होंगी मुहब्बत की रुसवाईयां
मेरे मरने से गूजेंगी शहनाईयां
रोयेगी मौत भी बेकसी पे मरेगी
जब उठेगा जनाजा यहां से
हम चले इस जहां से
दिल उठ गया यहां से........................
अब जियें तो जियें किस की खातिर जियें
जिंदगी का जहर किस खुशी में पियें
जब बना आशियां, जब खिला गुलसितां
गिर गयी बिजलिया आसमां से
हम चले इस जहां से दिल उठ गया यहां से
जिंदगी का छलकने को अब जाम है
मरते मरते भी लब पे तेरा नाम है
तू सलामत रहे ता कयामत रहे
हम अकेले चले हैं यहां से
हम इस जहां से
उन्हें दे दो खबर मर चले हम मगर
ले चले याद उनकी यहां से

No comments: