हम चले इस जहां से
दिल उठ गया यहां से
उन्हें दे दो खबर मर चले हम मगर
ले चले याद उनकी जहां से
यूं भी होंगी मुहब्बत की रुसवाईयां
मेरे मरने से गूजेंगी शहनाईयां
रोयेगी मौत भी बेकसी पे मरेगी
जब उठेगा जनाजा यहां से
हम चले इस जहां से
दिल उठ गया यहां से........................
अब जियें तो जियें किस की खातिर जियें
जिंदगी का जहर किस खुशी में पियें
जब बना आशियां, जब खिला गुलसितां
गिर गयी बिजलिया आसमां से
हम चले इस जहां से दिल उठ गया यहां से
जिंदगी का छलकने को अब जाम है
मरते मरते भी लब पे तेरा नाम है
तू सलामत रहे ता कयामत रहे
हम अकेले चले हैं यहां से
हम इस जहां से
उन्हें दे दो खबर मर चले हम मगर
ले चले याद उनकी यहां से
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