Tuesday, January 9, 2007

गीत (माजिद कैलाशपुरी)

तुम हुस्न बेमिसाल अदा लाजवाब हो
कलियों की हो तमन्ना तो फूलों का ख्वाब हो।

नाज़ुक सा ये बदन ये तबस्सुम की बिजलियाँ
तारीफ जिसकी करती है ये सारी कहकशां
करता है जिससे प्यार चमन वोह गुलाब हो।
तुम ....................
कलियों .....................

रंगत अजब सी तुम में है जो फूल में नही
आँखों में जो चमक है वोह कोहिनूर में नही
पी जाए बस नज़र से जो तुम वोह शराब हो।
तुम .....................
कलियों ......................

कैसे करू तलाश किसी एक हसीन को
ढूँढा करू मैं कैसे किसी नाजनीन को
माजिद के हर सवाल का तुम ही जवाब हो।
तुम ....................
कलियों .....................

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