Friday, July 31, 2009

भारत और इंडिया को करीब लाता बजट


संसद में जब वित्तमंत्री देश का आम बजट पेश कर रहे थे तो उस वक्त यह एहसास सबको हुआ होगा कि एक लोकतांत्रिक देश का बजट ऐसा ही होना चाहिए। शायद ग्रामीण विकास जिस पर देश की आर्थिक एवं राजनैतिक व्यवस्था टिकी हुई है, को बजट में सबसे ज्यादा महत्व दिया गया। बजट इंडिया की बजाय भारत को ध्यान में रखकर बनाया गया तथा इंडिया और भारत का अंतर कम करने की कोशिश की गयी। हालांकि बजट से कॉर्पोरेट जगत ज्यादा खुश नहीं है लेकिन वित्तमंत्री का विचार है कि यदि किसान और ग्रामीण संपन्न होगा तो इससे उद्योग भी चमकेंगे। भले ही शेयर बाजार बेहाल हो रहा हो लेकिन समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग बजट से काफी प्रसन्न हैं। भारत जिसके बारे में कहा जाता है कि वह गांव में निवास करता है और यदि भारत को सुदृढ़ करना है तो गांव को मजबूत करना होगा। यही सोच कर कांग्रेस केंद्र सरकार ने अपने चुनावी वादे के तहत गांव तथा कृषि विकास के लिए बजट के माध्यम से असीम धनराशि की बरसात की है। इसे आप सियासी कलाबाजी कहें या इस आर्थिक मंदी के दौर में भारत की आर्थिक व्यवस्था को सहारा देने की कोशिश। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इन उम्मीदों को कुछ हद तक पूरा भी किया है। देश इस वक्त ऐसे आर्थिक उथल - पुथल का शिकार है , जो पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया। आम चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( यूपीए ) की सरकार बेहतर जनादेश के साथ सत्ता में दोबारा आई। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने लोगों की उम्मीदों पर पंख लगा दिए। कुछ भी हो बजट से ग्रामीण विकास एवं कृषि जगत में खुशी की लहर दौड़ गयी। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि बजट में नरेगा जैसे सफल योजना के लिए धनराशि को 144 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि नरेगा के माध्यम से ग्रामीणों के जीवन की कठिनाइयों को सरल किया गया है। नरेगा के लिये 39,100 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की गयी है। इसके साथ ही राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को 7000 करोड़ रुपये प्रदान किये गये हैं। यह एक वास्तविकता है कि यदि गांव को मजबूत करना है तो वहां विद्युत आपूर्ति को और अधिक मजबूत करना होगा। बजट द्वारा आम आदमी को रोजगार गारंटी योजना में विस्तार और 25 किलो अनाज तीन रुपए प्रति किलो में उपलब्ध होने से राहत मिलेगी। किसानों और छोटे उद्योगों को सस्ता कर्ज मिलने से राहत मिलेगी। छोटी अवधि का तीन लाख रुपये तक का लोन लेेने वाले किसान यदि अपने कर्ज को समय के भीतर वापस कर देते हैं तो उनके लिये ब्याज दर सात फीसदी के बजाय छह फीसदी होगी। सरकार का यह कदम शायद किसानों को समय पर कर्ज वापस करने के लिये प्रोत्साहित करना भी हो सकता है। इसके अलावा किसानों को सीधे कृषि सब्सिडी का प्रस्ताव भी किया गया। कृषि के लिये कर्ज के लक्ष्य को बढ़ाकर 3,25,000 रुपये कर दिया गया है। सिंचाई परियोजनाओं को अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की। इसके अलावा वित्त मंत्री ने कृषि विकास दर हर साल चार फीसदी बढ़ाने का ऐलान भी किया। बजट में ग्रामीण आवास कोष के लिये 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति बाहुल्य वाले गांवों के लिये प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना की भी बात कही गयी है तथा इसके साथ राष्टï्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की शुरुआत भी इस साल 100 करोड़ से शुरू करने की बात कही गयी है। ग्रामीणों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राष्टï्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में 257 करोड़ रुपये का आवंटन बढ़ा दिया गया। हालांकि बजट में कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों को इतनी रकम आवंटन के बाद भी विशेषज्ञ इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों को कहना है कि कृषि के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने की योजना से किसानों को विशेष लाभ नहीं होगा। उनकी मुख्य जरूरत कृषि उत्पादों के मूल्यों में बढ़त है। इस दिशा में उन्हें राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
ऐसा नहीं है कि बजट में दूसरे क्षेत्रों को ध्यान नहीं रखा गया है लेकिन इस बजट की विशेषता सिर्फ यही है कि पूरा बजट एक ग्रामीण भारतीय, आम भारतीय तथा एक भारतीय किसान के नाम कर दिया गया। बजट में दूसरी राहतें भी प्रदान की गयी हैं जैसे सभी करदाताओं के लिए बेसिक छूट एक लाख 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख 60 हजार कर दी गई है और आयकर पर लगने वाले दस प्रतिशत सरचार्ज को हटा दिया गया है। बजट में मंदी के असर को समाप्त करने के लिये वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लक्ष्य को त्याग दिया गया है। सरकार नोट छापकर बुनियादी संरचना में निवेश करेगी जिससे घरेलू बाज़ार में सीमेंट स्टील और श्रम की मांग बढ़ेगी और मंदी को तोडऩे में मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य आम उपभोक्ताओं के हाथों में ज्यादा पैसा देना है। इससे देश में मांग को बल मिलेगा, नतीजतन आर्थिक वृद्धि दर को रफ्तार मिल सकेगी। पिछले पांच साल तक बढ़ते निवेश के चलते आर्थिक वृद्धि दर को तेजी मिलती रही, अब आने वाले कुछ सालों तक आर्थिक तरक्की में मांग बड़ी भूमिका अदा करेगी। बजट और आर्थिक नीतियों को समझने के लिए हमें मामले की तह तक जाना होगा। यह बजट ऐसे समय आया है , जब देश में मांग का स्तर लगभग स्थिर बना हुआ है और ग्रामीण व शहरी इलाकों के आर्थिक हालातों में अंतर बढ़ता चला जा रहा है।
संपादन विभाग





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